1. बाबर (1526–1530)- साम्राज्य का संस्थापक
• बाबर मुगल वंश का संस्थापक था।
• वह तुर्क एवं सुन्नी मुसलमान था।
• जन्म - 24 फरवरी, 1483 ई.
• पिता - उमरशेख मिर्ज़ा (फरगना का शासक)
• 8 जून, 1494 ई. को फरगना की गद्दी पर बैठा।
• 1507 ई. में ‘बादशाह’ की उपाधि धारण की।
बाबर के पुत्र
– हुमायूँ, कामरान, अस्करी, हिंदाल
भारत पर आक्रमण
• भारत पर 5 बार आक्रमण किया।
• भारत पर आक्रमण का प्रथम अभियान : 1519 ई. (यूसुफ़जाई जाति के विरुद्ध)
• भारत पर आक्रमण का निमंत्रण
– दौलत खाँ लोदी
– राणा साँगा
सैन्य अभियान-
1.पानीपत का प्रथम युद्ध (1526)- इब्राहिम लोदी को हराया। भारत में पहली बार बारूद और तोपखाने का बड़े पैमाने पर प्रयोग। उसने 'तुगलुमा' (Tulghuma) युद्ध पद्धति अपनाई।
2.खानवा का युद्ध (1527)- मेवाड़ के राणा सांगा को पराजित किया। इस युद्ध में बाबर ने 'जिहाद' का नारा दिया और विजय के बाद 'गाजी' की उपाधि धारण की।
3.चंदेरी का युद्ध (1528)- मेदिनी राय को हराया।
4.घाघरा का युद्ध (1529)- अफगान शक्तियों को अंतिम रूप से पराजित किया।
अन्य तथ्य
• भारत में तोपखाने का प्रथम प्रयोग।
• उपाधियाँ – ‘कलंदर’, ‘गाज़ी’
• आत्मकथा – उसने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) लिखी, फारसी भाषा में अनुवाद अब्दुल रहीम खानखाना ने किया
• मृत्यु - 26 दिसंबर, 1530 ई. (आगरा)
2. हुमायूँ (1530 - 1556 ई. )
• पूरा नाम - नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ
• गद्दी पर बैठा - 29 दिसंबर, 1530 ई.
• गद्दी पर बैठते समय आयु - 23 वर्ष
• गद्दी पर बैठने से पहले बदख्शां का सूबेदार था।
विवाह एवं संतान
• 29 अगस्त, 1541 ई. को हुमायूँ ने हमिदा बानो बेगम से विवाह किया।
• हमिदा बानो बेगम से ही अकबर का जन्म हुआ।
राज्य का विभाजन
• हुमायूँ ने पिता बाबर के निर्देशानुसार राज्य का बँटवारा अपने भाइयों में किया
– कामरान → काबुल और कंधार
– मिर्जा अस्करी → संभल
– मिर्जा हिंदाल → अलवर और मेवाड़
– छोटे भाई (चचेरे भाई )मिर्जा → बदख्शां प्रदेश
प्रमुख युद्ध
1.देवर का युद्ध (1531 ई.)
• स्थान – देवर (गुजरात क्षेत्र)
• विरोधी – बहादुर शाह (गुजरात का शासक)
हुमायूँ ने क्या किया
• गुजरात के शासक बहादुर शाह की बढ़ती शक्ति को रोकने के लिए अभियान चलाया
• देवर के पास मुगल सेना और गुजरात सेना के बीच युद्ध हुआ
• हुमायूँ ने साहस के साथ युद्ध का नेतृत्व किया
परिणाम
• बहादुर शाह पराजित हुआ
• गुजरात पर मुगलों का अधिकार हो गया
• यह हुमायूँ की प्रारंभिक सफलताओं में गिना जाता है
महत्व
• पश्चिमी भारत में मुगल प्रभाव बढ़ा
• हुमायूँ की सैनिक क्षमता पहली बार दिखाई दी
2.चौसा का युद्ध (1539 ई.)
• स्थान – चौसा (बक्सर, बिहार के पास)
• विरोधी – शेर खाँ (बाद में शेरशाह सूरी)
हुमायूँ ने क्या किया
• शेर खाँ से समझौते के बावजूद सावधानी नहीं बरती
• वर्षा ऋतु में सेना को नदी के किनारे ठहराया
• सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं की
युद्ध की स्थिति
• रात के समय शेर खाँ ने अचानक हमला कर दिया
• मुगल सेना पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई
परिणाम
• हुमायूँ की करारी हार हुई
• वह किसी तरह जान बचाकर भागा
• शेर खाँ ने अपने को “शेरशाह सूरी” घोषित किया
महत्व
• यह हुमायूँ की सबसे बड़ी सैन्य हार थी
• मुगल सत्ता कमजोर हो गई
युद्ध 3. बिलग्राम (कन्नौज) का युद्ध (1540 ई.)
• स्थान – बिलग्राम / कन्नौज (उत्तर प्रदेश)
• विरोधी – शेरशाह सूरी
हुमायूँ ने क्या किया
• चौसा की हार के बाद अंतिम प्रयास किया
• बड़ी सेना एकत्र की
• परंतु भाइयों में आपसी फूट बनी रही
युद्ध की स्थिति
• शेरशाह की युद्ध-रणनीति श्रेष्ठ थी
• मुगल सेना में अनुशासन की कमी थी
परिणाम
• हुमायूँ की निर्णायक पराजय हुई
• मुगल साम्राज्य पूरी तरह समाप्त हो गया
• शेरशाह सूरी भारत का सम्राट बना
महत्व
• भारत में सूरी वंश की स्थापना हुई
• हुमायूँ को भारत छोड़ना पड़ा
युद्ध 4. सरहिंद का युद्ध (1555 ई.)
• स्थान – सरहिंद (पंजाब)
• विरोधी – सिकंदर शाह सूरी
• मुगल पक्ष का नेतृत्व – बैरम खाँ
हुमायूँ ने क्या किया
• ईरान से सहायता लेकर भारत लौटा
• काबुल और लाहौर पर अधिकार किया
• सरहिंद में अंतिम निर्णायक युद्ध हुआ
युद्ध की स्थिति
• मुगल सेना संगठित और अनुशासित थी
• बैरम खाँ की युद्ध नीति प्रभावशाली थी
परिणाम
• सिकंदर शाह सूरी पराजित हुआ
• दिल्ली और आगरा पुनः मुगलों के अधीन आए
• मुगल साम्राज्य की पुनः स्थापना हुई
महत्व
• 15 वर्षों बाद मुगल शासन वापस लौटा
• हुमायूँ पुनः भारत का सम्राट बना
रचना- हुमायूँनामा गुलबदन बेगम ने किया
मृत्यु - 24 जनवरी, 1556 ई. में पुस्तकालय (दीनपनाह) की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई।
3. अकबर (1556–1605 ई.)
मुगल साम्राज्य का महान सम्राट
पूरा नाम – जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर
जन्म – 15 अक्टूबर 1542 ई.
पिता – हुमायूँ
माता – हमीदा बानो बेगम
राज्याभिषेक – 1556 ई. (कलानौर)
संरक्षक – बैरम खाँ
मृत्यु – 1605 ई.
अकबर की विशेषताएँ
• मुगल वंश का सबसे महान शासक
• धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई
• मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था बनाई
• साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार किया
• जनता के कल्याण पर विशेष ध्यान
अकबर का शासनकाल – तीन चरण
1556–1560 → बैरम खाँ का संरक्षण काल
1560–1575 → स्वतंत्र शासन काल
1575–1605 → धार्मिक व प्रशासनिक सुधार काल
अकबर की प्रमुख उपलब्धियाँ
• केन्द्रीय शासन की मजबूत व्यवस्था
• मनसबदारी प्रणाली की शुरुआत
• धार्मिक सहिष्णुता
• जजिया कर समाप्त
• राजपूतों से मैत्री नीति
अकबर के प्रमुख युद्ध (सैन्य अभियान)
1.पानीपत का द्वितीय युद्ध – 1556
• विरोधी – हेमू (हेमचंद्र विक्रमादित्य)
• युद्ध – अकबर बनाम हेमू
• नेतृत्व – बैरम खाँ
परिणाम
• अकबर की विजय
• मुगल शासन पुनः स्थापित
• अकबर भारत का वास्तविक शासक बना
2.हल्दीघाटी का युद्ध – 1576
• विरोधी – महाराणा प्रताप
• सेनापति – मानसिंह (मुगल पक्ष)
परिणाम
• युद्ध निर्णायक नहीं रहा
• महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता बनाए रखी
3.गुजरात विजय – 1572–73
• गुजरात को मुगल साम्राज्य में मिलाया
• अकबर ने 17 दिन में 600 मील की यात्रा की
• यह उसकी अद्भुत सैन्य सफलता मानी जाती है
4.बंगाल, बिहार, कश्मीर, सिंध विजय
• मुगल साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार
• अकबर भारत का सबसे शक्तिशाली शासक बना
अकबर की राजपूत नीति
• विवाह संबंध स्थापित किए
• राजपूतों को उच्च पद दिए
• उनकी धर्म व परंपरा में हस्तक्षेप नहीं किया
परिणाम
• राजपूत मुगलों के वफादार बने
• साम्राज्य मजबूत हुआ
अकबर की धार्मिक नीति
• सर्वधर्म समभाव
• सभी धर्मों का सम्मान
• कट्टरता का विरोध
प्रमुख कदम
• जजिया कर समाप्त (1564)
• तीर्थ यात्रा कर समाप्त
• धार्मिक स्वतंत्रता
इबादतखाना (1575)
• निर्माण स्थान – फतेहपुर सीकरी
• उद्देश्य – धार्मिक वाद-विवाद
• हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन, पारसी भाग लेते थे
दीन-ए-इलाही (1582)
• अकबर द्वारा प्रारंभ किया गया नया धर्म
• सभी धर्मों के अच्छे तत्वों का मिश्रण
विशेषताएँ
• ईश्वर भक्ति
• नैतिक जीवन
• अहिंसा
• सीमित अनुयायी
महत्व
• अकबर की उदार सोच को दर्शाता है
अकबर की प्रशासनिक व्यवस्था
केन्द्रीय प्रशासन
• सम्राट सर्वोच्च अधिकारी
• दीवान – राजस्व
• मीर बख्शी – सेना
• सदर-उस-सुदूर – धार्मिक कार्य
मनसबदारी प्रथा
• सैन्य व प्रशासनिक व्यवस्था
• मनसब = पद
• जात और सवार प्रणाली
महत्व
• सेना पर नियंत्रण
• योग्य अधिकारियों की नियुक्ति
भूमि राजस्व व्यवस्था
• टोडरमल द्वारा लागू
• दहसाला प्रणाली
• उपज का 1/3 भाग कर
अकबर के नवरत्न
1.अबुल फज़ल – इतिहासकार (आइने-अकबरी)
2.फैज़ी – कवि
3.तानसेन – संगीतज्ञ
4.बीरबल – बुद्धिमत्ता
5.राजा टोडरमल – वित्त मंत्री
6.मानसिंह – सेनापति
7.अब्दुर रहीम खानखाना – कवि
8.हकीम हुमाम
9.मुल्ला दो प्याज़ा
अकबर की कला व स्थापत्य
• फतेहपुर सीकरी का निर्माण
• बुलंद दरवाजा (ऊँचाई – लगभग 172 फीट)
• पंचमहल
• जोधा बाई महल
अकबर का ऐतिहासिक महत्व
• भारत का महानतम शासक
• राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
• मजबूत प्रशासन का निर्माता
• धार्मिक सहिष्णुता का आदर्श
4.जहाँगीर (1605–1627 ई.)
पूरा नाम – नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर
वास्तविक नाम – सलीम
जन्म – 30 अगस्त 1569 ई.
पिता – अकबर
माता – जोधाबाई (मरियम-उज़-ज़मानी)
राज्याभिषेक – 1605 ई.
राजधानी – आगरा
मृत्यु – 1627 ई.
जहाँगीर का स्वभाव व व्यक्तित्व
• न्यायप्रिय शासक
• कला प्रेमी
• चित्रकला का महान संरक्षक
• परंतु शराब और अफीम का आदी
• शासन में नूरजहाँ का प्रभाव अधिक
जहाँगीर के शासन की प्रमुख विशेषताएँ
• न्याय व्यवस्था पर विशेष बल
• मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग
• विदेशी यात्रियों का आगमन
• नूरजहाँ युग की शुरुआत
न्याय व्यवस्था – “जंजीर-ए-अदालत”
• आगरा किले में सोने की जंजीर लगवाई
• कोई भी पीड़ित सीधे सम्राट से न्याय माँग सकता था
• इससे उसकी न्यायप्रियता सिद्ध होती है
जहाँगीर के प्रमुख विद्रोह व युद्ध
1.खुसरो का विद्रोह (1606)
• खुसरो – जहाँगीर का पुत्र
• पंजाब में विद्रोह किया
जहाँगीर ने क्या किया
• विद्रोह को दबाया
• खुसरो को बंदी बनाया
• गुरु अर्जुन देव को दंड दिया गया
महत्व
• सिख–मुगल संबंधों में कटुता बढ़ी
2.मेवाड़ अभियान (1615)
• विरोधी – महाराणा अमर सिंह (महाराणा प्रताप के पुत्र)
परिणाम
• मेवाड़ ने मुगल अधीनता स्वीकार की
• राजपूत सम्मान सुरक्षित रहा
• अकबर की नीति आगे बढ़ी
3.कंधार
• कंधार ईरान के हाथ चला गया
• जहाँगीर उसे पुनः प्राप्त नहीं कर सका
• यह उसकी बड़ी असफलता मानी जाती है
नूरजहाँ का प्रभाव (नूरजहाँ युग)
• विवाह – 1611 ई.
• वास्तविक सत्ता नूरजहाँ के हाथों में
नूरजहाँ की शक्तियाँ
• सिक्कों पर नाम खुदवाया
• फरमान जारी किए
• प्रशासन पर नियंत्रण
• “नूरजहाँ जुंटा” का निर्माण
नूरजहाँ जुंटा के सदस्य
• नूरजहाँ
• आसफ खाँ
• इतिमाद-उद-दौला
• खुर्रम (शाहजहाँ) – प्रारंभ में
जहाँगीर का सांस्कृतिक योगदान
चित्रकला
• मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग
• प्राकृतिक चित्रों का विकास
• पक्षी, पशु, मानव चित्र
प्रसिद्ध चित्रकार
• उस्ताद मंसूर
• बिशनदास
• अबुल हसन
साहित्य
• आत्मकथा – तुज़ुक-ए-जहाँगीरी
• फारसी भाषा को प्रोत्साहन
स्थापत्य कला
• इतिमाद-उद-दौला का मकबरा (आगरा)
• यह पूर्ण संगमरमर से बना पहला मुगल मकबरा
• ताजमहल की प्रेरणा माना जाता है
विदेशी यात्री
• सर थॉमस रो (अंग्रेज दूत) – 1615
• ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार की अनुमति
जहाँगीर की असफलताएँ
• शराब व अफीम की लत
• शासन में नूरजहाँ पर निर्भरता
• कंधार की हानि
• अंतकाल में प्रशासन कमजोर
जहाँगीर का ऐतिहासिक महत्व
• न्यायप्रिय शासक
• कला व चित्रकला का महान संरक्षक
• मुगल संस्कृति को समृद्ध किया
• प्रशासनिक रूप से मध्यम शासक
5. शाहजहाँ (1627–1657)- स्थापत्य का स्वर्ण युग
पूरा नाम – शाहबुद्दीन मुहम्मद शाहजहाँ
वास्तविक नाम – खुर्रम
जन्म – 5 जनवरी 1592 ई.
पिता – जहाँगीर
माता – जगत गोसाईं
राज्याभिषेक – 1628 ई.
राजधानी – आगरा (बाद में दिल्ली)
मृत्यु – 1666 ई.
शाहजहाँ का व्यक्तित्व
• कुशल प्रशासक
• न्यायप्रिय शासक
• स्थापत्य कला का महान संरक्षक
• वैभव व शान-शौकत प्रेमी
• अत्यधिक खर्चीला शासक
शाहजहाँ के शासन की प्रमुख विशेषताएँ
• मुगल स्थापत्य कला का स्वर्ण युग
• केन्द्रीय शासन मजबूत
• साम्राज्य का विस्तार
• कला, स्थापत्य व संस्कृति का विकास
शाहजहाँ के प्रमुख सैन्य अभियान
1.बुंदेलखंड अभियान (1635)
• विरोधी – जुझार सिंह बुंदेला
परिणाम
• बुंदेलखंड मुगल अधीन हुआ
• केंद्रीय सत्ता मजबूत हुई
2.अहमदनगर अभियान (1636)
• दक्कन की शक्ति को समाप्त किया
• बीजापुर व गोलकुंडा से संधि
• अहमदनगर मुगल साम्राज्य में मिला
3.कंधार अभियान (1649–1653)
• ईरान से कंधार वापस लेने के प्रयास
• तीन बार युद्ध हुआ
परिणाम
• असफलता
• कंधार ईरान के पास ही रहा
4.मध्य एशिया अभियान
• अपने पूर्वजों की भूमि जीतने का प्रयास
• आर्थिक हानि हुई
शाहजहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था
• अकबर की प्रशासनिक प्रणाली को जारी रखा
• मनसबदारी व्यवस्था में सुधार
• सेना व राजस्व व्यवस्था सुदृढ़
• शाहजहाँ का स्थापत्य योगदान- (स्वर्ण युग)
प्रमुख भवन
• ताजमहल – मुमताज़ महल की स्मृति में
• लाल किला – दिल्ली
• जामा मस्जिद – दिल्ली
• मोती मस्जिद – आगरा
• शाहजहाँनाबाद नगर की स्थापना
विशेषता
• सफेद संगमरमर का अधिक प्रयोग
• नक्काशी व जड़ाऊ कला
• स्थापत्य में पूर्णता
ताजमहल (1632–1653)
• विश्व धरोहर
• प्रेम का प्रतीक
• भारत की सबसे प्रसिद्ध इमारत
शाहजहाँ का दर्शनीय वैभव
• मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस)
• अपार राजकोष खर्च
• दरबार की भव्यता
उत्तराधिकार युद्ध (1657–1658)
शाहजहाँ के चार पुत्र
• दारा शिकोह
• शुजा
• औरंगज़ेब
• मुराद
परिणाम
• औरंगज़ेब विजयी हुआ
• दारा शिकोह की हत्या
• शाहजहाँ को आगरा किले में कैद किया गया
शाहजहाँ का अंतिम जीवन
• औरंगज़ेब द्वारा नजरबंद
• ताजमहल को देखते हुए जीवन बिताया
• 1666 ई. में मृत्यु
• मुमताज़ महल के पास दफन
शाहजहाँ की उपलब्धियाँ
• स्थापत्य कला का सर्वोच्च विकास
• मजबूत प्रशासन
• साम्राज्य की प्रतिष्ठा में वृद्धि
• कला व संस्कृति का संरक्षण
शाहजहाँ की कमजोरियाँ
• अत्यधिक खर्च
• उत्तराधिकार संघर्ष को न रोक पाना
• विदेशी अभियानों में असफलता
• राजकोष पर भारी बोझ
शाहजहाँ का ऐतिहासिक महत्व
• मुगल स्थापत्य का महानतम शासक
• “इंजीनियर किंग” कहा जाता है
• भारत की सांस्कृतिक पहचान को विश्व प्रसिद्ध बनाया
6. औरंगजेब 'आलमगीर' (1658–1707)
पूरा नाम – अबुल मुज़फ्फर मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर
उपाधि – आलमगीर (विश्व विजेता)
जन्म – 3 नवंबर 1618 ई.
पिता – शाहजहाँ
माता – मुमताज़ महल
राज्याभिषेक – 1658 ई.
शासनकाल – 1658 से 1707 ई.
मृत्यु – 1707 ई. (दक्कन)
औरंगज़ेब का स्वभाव व व्यक्तित्व
• अत्यंत परिश्रमी शासक
• सादा जीवन जीने वाला
• व्यक्तिगत रूप से ईमानदार
• कठोर अनुशासनप्रिय
• धार्मिक रूप से कट्टर
औरंगज़ेब के शासन की प्रमुख विशेषताएँ
• सबसे लंबा शासन (लगभग 49 वर्ष)
• मुगल साम्राज्य का सबसे बड़ा विस्तार
• निरंतर युद्धों का काल
• दक्कन नीति पर विशेष बल
• धार्मिक असहिष्णुता
उत्तराधिकार युद्ध (1657–1658)
शाहजहाँ के चार पुत्र –
• दारा शिकोह
• शुजा
• मुराद
• औरंगज़ेब
मुख्य घटनाएँ
• औरंगज़ेब ने सभी भाइयों को पराजित किया
• दारा शिकोह की हत्या करवाई
• शाहजहाँ को आगरा किले में कैद कर दिया
परिणाम
• औरंगज़ेब मुगल सम्राट बना
औरंगज़ेब के प्रमुख सैन्य अभियान
1.दक्कन अभियान
• उद्देश्य – दक्षिण भारत को मुगल अधीन करना
मुख्य विजय
• बीजापुर – 1686
• गोलकुंडा – 1687
परिणाम
• दक्कन सल्तनत समाप्त
• मुगल साम्राज्य अपने चरम विस्तार पर पहुँचा
2.मराठा संघर्ष
• प्रमुख विरोधी – शिवाजी
मुख्य घटनाएँ
• 1666 – शिवाजी आगरा दरबार में बंदी
• शिवाजी का चतुराई से पलायन
• मराठों द्वारा गुरिल्ला युद्ध
परिणाम
• मराठा शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई
• मुगल सेना कमजोर होती चली गई
3.राजपूत विद्रोह
• मारवाड़ व मेवाड़ में विद्रोह
• जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद संघर्ष
परिणाम
• राजपूत–मुगल संबंध टूटे
• अकबर की राजपूत नीति समाप्त
4.सिख संघर्ष
• गुरु तेगबहादुर की हत्या – 1675
परिणाम
• सिखों में क्रांति
• आगे चलकर खालसा पंथ की स्थापना (गुरु गोबिंद सिंह)
औरंगज़ेब की धार्मिक नीति
मुख्य कदम
• जजिया कर पुनः लागू (1679)
• हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध
• कई मंदिरों को तुड़वाया
• संगीत व नृत्य पर रोक
• शरीयत कानून लागू
परिणाम
• जनता में असंतोष
• विद्रोहों की संख्या बढ़ी
औरंगज़ेब की प्रशासनिक नीति
• अकबर की प्रशासनिक व्यवस्था जारी
• स्वयं शासन पर नियंत्रण रखा
• रिश्वत व भ्रष्टाचार पर रोक
लेकिन –
• लगातार युद्धों से राजकोष खाली
• प्रशासन कमजोर होता गया
औरंगज़ेब की उपलब्धियाँ
• साम्राज्य का अधिकतम विस्तार
• शक्तिशाली सेना
• व्यक्तिगत सादगी
• कठोर अनुशासन
औरंगज़ेब की असफलताएँ
• धार्मिक असहिष्णुता
• मराठों को पूर्णतः न दबा पाना
• राजपूतों को शत्रु बनाना
• लगातार युद्ध नीति
• साम्राज्य का पतन प्रारंभ होना
औरंगज़ेब का अंतिम समय
• अंतिम 25 वर्ष दक्कन में बिताए
• जीवन युद्धों में समाप्त हुआ
• 1707 ई. में मृत्यु
कब्र – खुलदाबाद (औरंगाबाद)
बहुत साधारण कब्र (सादगी का प्रतीक)
औरंगज़ेब का ऐतिहासिक महत्व
• अंतिम शक्तिशाली मुगल सम्राट
• उसके बाद मुगल साम्राज्य तेजी से कमजोर हुआ
• उसकी नीतियाँ मुगल पतन का कारण बनीं
7. पतन और बहादुर शाह जफर (1857)
मुगल साम्राज्य के पतन के कारण (Causes of Decline of Mughal Empire)
1.औरंगज़ेब की नीतियाँ
• धार्मिक असहिष्णुता
• जजिया कर पुनः लागू
• मंदिर विध्वंस
• अकबर की सहिष्णु नीति समाप्त
परिणाम
• हिंदू जनता असंतुष्ट हुई
• विद्रोह बढ़े
• साम्राज्य कमजोर हुआ
2.निरंतर युद्ध नीति
• औरंगज़ेब के लंबे दक्कन युद्ध
• मराठों से लगातार संघर्ष
• 25 वर्षों तक युद्ध
परिणाम
• सेना थक गई
• राजकोष खाली हो गया
• प्रशासन कमजोर पड़ा
3.उत्तराधिकार की समस्या
• कोई निश्चित उत्तराधिकार नियम नहीं
• हर सम्राट की मृत्यु के बाद गृहयुद्ध
परिणाम
• शक्ति नष्ट
• जनता व सेना परेशान
4.अयोग्य उत्तराधिकारी
औरंगज़ेब के बाद शासक –
• बहादुर शाह प्रथम
• जहाँदार शाह
• फर्रुखसियर
• मुहम्मद शाह रंगीला
ये सभी कमजोर शासक थे।
परिणाम
• केंद्रीय सत्ता टूट गई
5.सामंतों और जागीरदारों की समस्या
• जागीरों की कमी
• अमीरों में असंतोष
• भ्रष्टाचार
परिणाम
• विद्रोह बढ़े
• प्रशासन ढीला हुआ
6.प्रांतीय सूबेदारों की स्वतंत्रता
• बंगाल
• अवध
• हैदराबाद
ये प्रांत स्वतंत्र होने लगे।
परिणाम
• साम्राज्य का विघटन
7.मराठा शक्ति का उदय
• शिवाजी के बाद मराठे शक्तिशाली बने
• चौथ व सरदेशमुखी वसूली
परिणाम
• मुगल सत्ता केवल नाम मात्र रह गई
8.विदेशी आक्रमण
• नादिरशाह का आक्रमण (1739)
• दिल्ली लूट
• कोहिनूर हीरा ले जाया गया
• अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण
परिणाम
• मुगल प्रतिष्ठा नष्ट
• आर्थिक तबाही
9.आर्थिक पतन
• कृषि संकट
• व्यापार गिरावट
• युद्ध खर्च
परिणाम
• सेना व प्रशासन कमजोर
10.यूरोपीय शक्तियों का उदय
• अंग्रेजों का आगमन
• ईस्ट इंडिया कंपनी की शक्ति
• प्लासी (1757) के बाद नियंत्रण
परिणाम
• मुगल केवल नाममात्र के शासक रह गए
मुगल काल की स्थिति
(Administrative, Social, Economic & Cultural Condition)
1.मुगल काल की प्रशासनिक स्थिति
मुगल प्रशासन अत्यंत संगठित और मजबूत था।
मुख्य विशेषताएँ
• सम्राट सर्वोच्च शासक होता था
• सभी शक्तियाँ सम्राट के हाथ में
• केंद्र, प्रांत और स्थानीय स्तर पर शासन
केंद्रीय प्रशासन
प्रमुख अधिकारी –
• वजीर / दीवान – राजस्व व वित्त
• मीर बख्शी – सेना व्यवस्था
• सदर-उस-सुदूर – धार्मिक व न्यायिक कार्य
• खान-ए-सामान – राजमहल व्यवस्था
प्रांतीय प्रशासन
• सूबा – सबसे बड़ी इकाई
• सूबेदार – प्रांत का प्रमुख
• दीवान – राजस्व
• फौजदार – कानून व्यवस्था
मनसबदारी प्रथा
• अकबर द्वारा शुरू
• मनसब = पद
• जात व सवार प्रणाली
• सेना पर केंद्रीय नियंत्रण
महत्व
• योग्य अधिकारियों की नियुक्ति
• विद्रोह पर नियंत्रण
भूमि राजस्व व्यवस्था
• टोडरमल की दहसाला प्रणाली
• उपज का लगभग 1/3 भाग कर
• नकद व अनाज दोनों में कर
2.मुगल काल की सामाजिक स्थिति
मुगल समाज विविधताओं से भरा था।समाज की प्रमुख विशेषताएँ
• हिंदू–मुस्लिम मिश्रित समाज
• जाति प्रथा प्रचलित
• संयुक्त परिवार व्यवस्था
• स्त्रियों की स्थिति कमजोर
स्त्रियों की स्थिति
• पर्दा प्रथा प्रचलित
• बाल विवाह
• सती प्रथा (सीमित क्षेत्र में)
• उच्च वर्ग की महिलाएँ शिक्षित
धार्मिक स्थिति
• कई धर्मों का सह-अस्तित्व
• अकबर की धार्मिक सहिष्णुता
• औरंगज़ेब काल में धार्मिक कट्टरता
सामाजिक सुधार
• अकबर द्वारा सती प्रथा रोकने का प्रयास
• विधवा विवाह को प्रोत्साहन
• बाल विवाह का विरोध
3.मुगल काल की आर्थिक स्थिति
मुगल काल भारत का आर्थिक स्वर्ण युग माना जाता है।कृषि व्यवस्था
• मुख्य आधार – कृषि
• अधिकांश जनता कृषक
• सिंचाई व्यवस्था विकसित
मुख्य फसलें –
• गेहूँ
• चावल
• कपास
• गन्ना
• मसाले
भूमि राजस्व
• राज्य की आय का प्रमुख स्रोत
• वैज्ञानिक कर व्यवस्था
• नियमित माप प्रणाली
उद्योग व कुटीर उद्योग
• वस्त्र उद्योग सबसे प्रमुख
• सूती व रेशमी कपड़े
• कालीन उद्योग
• हथकरघा
व्यापार
• आंतरिक व विदेशी व्यापार विकसित
• यूरोपीय व्यापारियों का आगमन
• बंदरगाह – सूरत, मछलीपट्टनम
मुख्य निर्यात –
• कपड़ा
• मसाले
• नील
• अफीम
मुद्रा व्यवस्था
• सोना – मोहर
• चाँदी – रुपया
• ताँबा – दाम
4.मुगल काल की सांस्कृतिक स्थिति
मुगल काल भारतीय संस्कृति का स्वर्ण युग माना जाता है।कला एवं स्थापत्य
• भव्य इमारतों का निर्माण
• फारसी व भारतीय शैली का मिश्रण
प्रमुख स्थापत्य –
• ताजमहल – शाहजहाँ
• लाल किला – दिल्ली
• फतेहपुर सीकरी – अकबर
• जामा मस्जिद
चित्रकला
• मुगल चित्रकला का विकास
• जहाँगीर काल – स्वर्ण युग
• प्राकृतिक चित्र
साहित्य
• फारसी राजभाषा
• ऐतिहासिक ग्रंथों की रचना
प्रमुख ग्रंथ –
• अकबरनामा – अबुल फज़ल
• आइने-अकबरी
• तुज़ुक-ए-जहाँगीरी
संगीत
• अकबर काल – संगीत का उत्कर्ष
• तानसेन प्रमुख संगीतज्ञ
• ध्रुपद शैली विकसित
धार्मिक संस्कृति
• सूफी और भक्ति आंदोलन का प्रभाव
• हिंदू–मुस्लिम सांस्कृतिक समन्वय
