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पेड़ की बात।ped Ki Baat।CGBSE। Class 6 – सरल व्याख्या, प्रश्न-उत्तर व पूरी कहानी

 

गद्यांश की व्याख्या के प्रश्न-उत्तर – हिंदी पाठ समझ अभ्यास

गद्यांशों की व्याख्या

दिए गए गद्यांशों को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

 1. सूक्ष्मदर्शी से अत्यंत सूक्ष्म पदार्थ स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। पेड़ की डाल अथवा जड़ का इस यंत्र द्वारा परीक्षण करके देखा जा सकता है कि पेड़ में हजारों-हजार नल हैं। इन्हीं सब नलों के द्वारा माटी से पेड़ के शरीर में रस का संचार होता है।

इसके अलावा वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं। सूक्ष्मदर्शी के जरिए अनगिनत मुँह पर अनगिनत होंठ देखे जा सकते हैं। जब आहार करने की जरूरत न हो तब दोनों होंठ बंद हो जाते हैं। जब हम श्वास-प्रश्वास ग्रहण करते हैं तब प्रश्वास के साथ एक प्रकार की विषाक्त वायु बाहर निकलती है, उसे 'अंगारक' वायु कहते हैं। अगर यह जहरीली हवा पृथ्वी पर इकट्ठी होती रहे तो तमाम जीव-जंतु कुछ ही दिनों में उसका सेवन करके नष्ट हो सकते हैं। जरा विधाता की करुणा का चमत्कार तो देखो, जो जीव-जंतुओं के लिए जहर है, पेड़-पौधे उसी का सेवन करके उसे पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं।

प्रश्न-

 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

 (i) अत्यन्त सूक्ष्म पदार्थ सूक्ष्मदर्शी यंत्र की सहायता से स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

 (ii) प्रश्वास के साथ एक प्रकार विषाक्त वायु बाहर निकलती है, जिसे अंगारक वायु कहते हैं।

 (iii) वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं।

 (iv) हवा का तत्सम शब्द वायु है।

 (v) शुद्ध का विलोम शब्द अशुद्ध है।


 2. अब तो समझ गए होंगे कि प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है। सूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है। पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है। पेड़-पौधे व समस्त हरियाली प्रकाश हथियाने के जाल हैं। पशु-डाँगर, पेड़-पौधे या हरियाली खाकर अपने प्राणों का निर्वाह करते हैं। पेड़-पौधों में जो सूर्य का प्रकाश समाहित है वह इसी तरह जंतुओं के शरीर में प्रवेश करता है। अनाज व सब्जी न खाने पर हम भी बच नहीं सकते हैं। सोचकर देखा जाए तो हम भी प्रकाश की खुराक पाने पर ही जीवित हैं।

प्रश्न-

 1. जीवन का मूलमंत्र क्या है?

 उत्तर- जीवन का मूलमंत्र प्रकाश है।


2. पेड़ कब पल्लवित होते हैं?

  उत्तर-  सूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित होते हैं।


3. प्रकाश हथियाने का जाल कौन हैं?

  उत्तर- पेड़-पौधे व समस्त हरियाली प्रकाश हथियाने के जाल है।


4. ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह कौन सी ऊर्जा होती है?

 उत्तर-  सूर्य की ऊर्जा होती है।



3. वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं। मधुमक्खी व तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। मधुमक्खी के आगमन से वृक्ष का भी उपकार होता है। तुम लोगों ने फूल में पराग-कण देखे होंगे। मधुमक्खियाँ एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं। पराग-कण के बिना बीज पक नहीं सकता। इस प्रकार फूल में बीज फलता है। अपने शरीर का रस पिलाकर वृक्ष बीजों का पोषण करता है। अब अपनी जिन्दगी के लिए उसे मोह-माया का लोभ नहीं है। तिल-तिल कर संतान की खातिर सब-कुछ लुटा देता है। जो शरीर कुछ दिन पहले हरा-भरा था, अब वह बिल्कुल सूख गया है। अपने ही शरीर का भार उठाने की शक्ति क्षीण हो चली है।

प्रश्न-

1. मधुमक्खी व तितली फूलों से क्या लेती हैं?

उत्तर- मधुमक्खी व तितली फूलों से शहद (रस) का मधुपान करती हैं।


2. बीजों का पोषण कौन करता है?

 उत्तर- अपने शरीर का रस पिलाकर वृक्ष बीजों का पोषण करता है।


3. 'उपकार' का विलोम शब्द क्या है?

 उत्तर- अपकार


4. बीज कैसे पकता है?

उत्तर- मधुमक्खियाँ एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं, पराग-कण के बिना बीज पक नहीं सकता।



पाठ से प्रश्न-अभ्यास

मेरी समझ से


(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए -

 1. "जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो" पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?

    • उसे उल्टा लटकाया गया है।

    • उसे किसी ने सजा दी है।

    • बच्चे को गमला रखना नहीं आया।

    • प्रकाश ऊपर से आ रहा है।

उत्तर- (*) उसे उल्टा लटकाया गया है।


 2. पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?

   • हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।

   • हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।

   • हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।

   • धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।

उत्तर- (*) हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।


 

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।


(क) "पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।"

उत्तर- भोजन के बिना जीवित रहना असंभव है, उसी प्रकार पेड़-पौधों का जीवन भी प्रकाश के बिना असंभव है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधे क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइ-ऑक्साइड और जल से भोजन बनाते हैं तथा ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। पौधों के प्रत्येक रेशे में सूर्य की ऊर्जा संचित रहती है। जब ईंधन जलाया जाता है, तो उससे जो प्रकाश और ताप निकलता है, वह वास्तव में सूर्य की संचित ऊर्जा ही है।


(ख) "मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।"

उत्तर- मधुमक्खियाँ और तितलियाँ फूलों से परागकण लेकर उन्हें दूसरे फूलों तक पहुँचाती हैं, जिससे परागण की प्रक्रिया पूर्ण होती है। इस प्रकार वे पौधों की प्रजनन क्रिया में सहायक होती हैं। साथ ही ये फूलों का रसपान करके उनकी सुंदरता और जीवन्तता बढ़ाती हैं। मधुमक्खी और तितली का वृक्षों से यह संबंध प्राकृतिक और परस्पर लाभकारी है।



मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते है। 


क्र.सं. वाक्यांश अर्थ या संदर्भ
1. बीज का ढक्कन दरक गया 6. बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए।
2. उसे 'अंगारक' वायु कहते हैं 4. साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु कार्बन डाइ-ऑक्साइड।
3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे 'अंगारक' वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं 5. सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।
4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है 2. जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है।
5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो 3. अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न संतुष्ट।
6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं 1. मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।




सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए,पता लगाइए और लिखिए-

क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?  
उत्तर- बीज के अंकुरित होने में मिट्टी में उपस्थित जल और पोषक तत्व, सूर्य का प्रकाश, वायु में विद्यमान कार्बन डाइ-ऑक्साइड तथा ताप का सहयोग मिलता है। इन सबके सम्मिलित प्रभाव से बीज अंकुरित होकर पौधा बनता है और पुष्पित व पल्लवित होता है।

(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?  
उत्तर- पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा स्वयं बनाते हैं। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरी पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल की सहायता से वे कार्बन डाइ-ऑक्साइड और जल से अपना भोजन तैयार करते हैं तथा ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं।


अनुमान या कल्पना से


(क) "इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।" वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?  
उत्तर- वृक्ष के समाप्त होने के बाद भी वह हमारे लिए अत्यंत उपयोगी होता है। उसकी लकड़ियों से घर, फर्नीचर और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। सूखी लकड़ियाँ ईंधन के रूप में काम आती हैं, और उनसे कागज़ भी बनाया जाता है। वृक्ष से गिरे बीज फिर अंकुरित होकर नए पौधों में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार वृक्ष भले ही समाप्त हो जाए, परंतु उसका जीवन चक्र प्रकृति में निरंतर चलता रहता है।


(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?  
उत्तर- जो व्यक्ति प्रकृति से जुड़ा होता है, उसे पेड़-पौधों से स्वाभाविक प्रेम होता है। पेड़ों की हरियाली, ताज़ी हवा और बागों में खिले रंग-बिरंगे फूल मन को आनंदित कर देते हैं। प्रकृति की सुंदरता और शीतलता हमें प्रेरित करती है। संभवतः इसी कारण लेखक की रुचि भी पेड़-पौधों के प्रति जागृत हुई होगी।


प्रवाह चार्ट

बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए-  

उत्तर- 





शब्दों के रूप

नीचे दिए गए चित्र को देखिए। यहाँ मिट्टी से जुड़े, कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं जो उसकी विशेषता बता रहे हैं। अब आप पेड़, सर्दी, सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए–
मिट्टी
मिट्टी
चिकनी
नम
भुरभुरी
काली
रेतीली
उपजाऊ
उत्तर- सूर्य– अहिल्याबाई के गुण
सूर्य
तेज
परोपकारी
चमकता
आग उगलता
जलता
प्रकाशन
धुंधला
ऊंचा
सर्दी – अहिल्याबाई के गुण
सर्दी
अधिक
बर्फीली
ठिठुरती
कड़कती
कम
गलाने वाली
नरम
दाँत किट-
कीटने वाली
पेड़– अहिल्याबाई के गुण
पेड़
ऊंचा पेड़
पुराना
हरा
फलदायक
घना
परोपकारी
बड़ा
छोटा

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